सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शान्ति से भर जाना

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मंगलवार, 3 नवंबर 2009

आरएसएस प्रमुख भागवत के नाम पत्र

जिन दिनों भाजपा सरकार के नेतृत्व वाले गुजरात में मजहब के नाम पर इंसानियत का कत्लेआम हो रहा था। लोगों को घरों में जिंदा इसलिए जलाया जा रहा था, क्योंकि वे मुसलमान थे। भाई-भाई को लहू का प्यासा बनाया जा रहा था। जिन दिनों बाबरी मस्जिद ढाहने का जश्न मनाया जा रहा था। देश को दंगे की आग में झोंका गया था..., उस दिन आरएसएस वाले मोहन भागवत आप कहां थे? क्या कर रहे थे? यह सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि इन दिनों आप बहुत बोलने लगे हैं - देश की सम्प्रभुता खतरे में है।
हिटलर के वंशज समझे जाने वाले आपकी बिरादरी से जनता जानना चाहती है कि क्या उन दिनों देश खतरे में नहीं था? संप्रभुता व अखंडता को खतरा नहीं था?आप कहते हैं कि बंग्लादेश से घुसपैठ हो रहा है। लेकिन क्या यह सच नहीं है कि बंग्लादेशी घुसपैठियों से ज्यादा खतरनाक आरएसएस के गुंडे हैं जो देश में सांप्रदायिक उत्पात मचा रहे हैं? घुसपैठियों से तो भारतीय फौज निबट लेगी, लेकिन इन आस्तीन के सांपों से निबटने के लिए क्या किया जाये? आपके शब्दों में अगर बंग्लादेश से आतंकवादी भारत में घुस रहे हैं! तो क्या यह सच नहीं कि नेपाल के रास्ते सदियों से आतंकी देश घुसते आये हैं। जब वह हिन्दू राष्ट्र था, उस समय आपने नेपाल बार्डर सील करने की बात क्यों नहीं की?दूसरा मुद्दा आपने उठाया है नक्सलियों का। आप मानते हैं इन्हें गोलियों से भून दिया जाये। आपको अपनी इस सोच पर शर्म करना चाहिए। जिन्हें आप गोलियों से भून डालने के लिए सरकार को उकसा रहे हैं, वह गांव के गरीब हैं जिन्हें वर्षों से रोटी व रोजगार नसीब नहीं हुआ है। इन्हें आपके स्वयंसेवकों की तरह हथियार प्रदर्शन का शौक नहीं है। जरा सोचिए- आप पूजा के बहाने हथियार लहरा कर शक्ति प्रदर्शन करते हैं, कुर्सी हथियाने की सियासत करते हैं। और ये गरीब रोटी के लिए हथियार उठाते हैं, पकड़े जाने पर जेल भी जाते हैं। श्रीमान, कोई मां के पेट से बंदूक लेकर पैदा नहीं होता, और ना ही कोई बंदूक उठाना चाहता है। यह तो आप जैसे अद्र्ध सामंतों की देन है कि गरीब बंदूक उठा रहे हैं। आप व्यवस्था की खामियों को दूर करने की सियासत करते तो शायद इनके हित में होता। लेकिन आपको मंदिर, मस्जिद से फुर्सत कहां? आपको तो लोगों की लाश पर राजनीति करने में मजा आता है।

(पिछले दिनों बिहार के समस्तीपुर व मध्यप्रदेश के जबलपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिये गये भाषण पर एक प्रतिक्रिया)

4 टिप्‍पणियां:

  1. main hindoowadi to nahin lekin aapka lekh jhoothi, mangadhant aur sathi baton ki gathri ke alawa kuchh nahin jo suni sunai baton baton ke adhar par likha gaya lagta hai,
    RSS wale kabhi hathiyar leke pooja nahin karte ye to uske virodhi bhi jante hain, wo kisi aur dal se bhale hon lekin Swayam sewak nahin hote.
    aur jinka aap paksh le rahe hain main manta hoon wo naxali tab tak theek the jab unhone apne aandolan ki shuruaat ki thi lekin aaj unka swaroop badal gaya hai, AK 47 rakhne walon ke paas 2 roti nahin, sahi kaha aapne...
    Jai Hind...

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  2. भाई साहब इतना बडा आदमी और इतना सा पत्र, हमें देखो उनके लिये जितने बडे वो उतना बडा पत्र लेके बैठे हैं,

    मेरी 19 अक्‍तूबर की पोस्‍ट देखो
    ''आर.एस.एस. के भूतपूर्व प्रचारक ‘‘बलराज मधोक’’’ के नाम एक पत्र''
    http://islaminhindi.blogspot.com/2009/10/book.html

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  3. भाई वाह क्या बात है लगता है सलीम मियाँ से काफी प्रेणीत हो। बकवास-बकवास किए जा रहे है। न पता की आपको सच्चाई नहीं पता या आप बताना नहीं चाहिए। आप कह रहे है कि आपको आंतवादी से ज्यादा खतरनाक आर एस एस के लोग लगते है कहीं कुछ दिक्कत तो नहीं आपको। आप बंग्लादेश क्यो जा रहे है, आपको शायद पता होगा कि अभी कुछ दिनो पहले ही आजमगढ़ में कितने आंतकवादी पकड़े गये थे, पता तो आपको होगा ही आप पत्रकार जो ठहरे, तब तो आपको ये भी मालुम होगा वे सारे भारतीय थे और साथ ही मुसलमान भी थे। तो आप सारे भारतीय मुसलमानो को आतंकवादी क्यों नहीं कह देते ? किसी पर आरोप लगाने से पहले अपना गिरेबान देख लिया करो। और रही बात नक्सलियों की भागवत जी ने जो कुछ भी कहा ठीक ही कहा ऐसे लोगो को जिंदा छोड़ने का कोई मतलब ही नहीं बनता । गरीब और बेरोजगार तो बहुत हैं देश में तो आपके अनुसार सभी लोग हथियार उठा ले, वाह जी क्या सोच है। और ज्यादा कुछ क्या कहूँ।

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  4. अभी कुछ दिनों पहले आपने ठाकरे को लपेटा था। अब आपने भागवत पर भृकुटि तानी है। वाह, क्या मिजाज हैं आपके। मेरी सिर्फ एक ही मांग है। अपनी कलम से किसी बड़े मुस्लिम नेता पर कुछ ऐसी ही फड़कती हुई बातें अगली पोस्ट में आप पढ़वा दें। आपके सारे गुनाह माफ हो जाएंगे।

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