सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शान्ति से भर जाना

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सोमवार, 25 जनवरी 2010

इतने साल बाद आयी याद


ये हैं महाकवि आचार्य जानकी वल्‍लभ शास्‍त्री। मुजफ्फरपुर स्थित अपने निराला निकेतन में अपने कुत्‍तों के साथ जीवन बिता रहे हैं। इन्‍हें सरकार ने पदमश्री देने की घोषणा की है। लेकिन आचार्य खुश नहीं है। कहते हैं- इतने साल बाद आई याद।

1 टिप्पणी:

  1. चलिए, देर से ही सही, याद तो आई..वरना सरकार का तो ऐसा है कि...क्या कहें.

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