पृथ्वी दिवस : उत्तर बिहार में छिन गये जल-जंगल-जानवर रूपी गहने
धरती खुदा की लाजवाब नेमत है। आईना वही रहता, चेहरे बदल जाते हैं। एक वक्त ऐसा था जब उत्तर बिहार की धरती जल, जंगल और जानवर से आबाद थी। धरती जब हरियाली की चादर ओढ़कर मचल उठती तो कृषक फसल उत्सव का गान अलापते झूमने लगते। पर रफ्ता-रफ्ता धरती को हमारी ही नजर लग गई।
धरती के दामन पर हमने धड़ल्ले से रासायनिक खाद छिड़ककर हरियाली को लूट लिया। अब जैविक खाद के बहाने हरियाली लौटाने की बात कर रहे हैं। निर्झर बहने वाली नदियों को कुछ यों छेड़ा कि अब कहीं पानी-पानी है तो कहीं सूखा। इसी तरह पहले हमने झोले को ताक पर रखकर पॉलीथिन से दोस्ती गांठ ली, अब बांझ होती धरती पर मर्सिया गा रहे हैं।
मधुबनी, दरभंगा और समस्तीपुर में धरती की प्यास बुझाने वाले हजारों तालाबों, कुओं पर पिछले आठ-दस सालों में धड़ाधड़ हमने मकान खड़े कर लिए। अब माछ और मखाना का उत्पादन गिर रहा है तो छाती पीट रहे हैं। सिर्फ मधुबनी जिले में दस हजार तालाब थे। अब 3-4 हजार पर सिमट गये हैं। आखिर कहां गए तालाब?
उधर, समस्तीपुर जिले में वाया नदी और पश्चिमी चंपारण में चंद्रावत सूख चुकी है। पूर्वी चंपारण में लालबकेया नदी और सीतामढ़ी में लखनदेई नदियों की तलहटी भी चमक रही है। नेपाल से निकलने वाली सरिसवा नदी अब नाला बन चुकी है। कल-कारखाने नदी में ही जहर उगल रहे हैं। शान-ए-मोतिहारी यानी मोतीझील भी इतिहास बनने की ओर अग्रसर है। पर, इस बारे में सोचने की किसी को फुर्सत कहां? समस्तीपुर के तो दर्जनों गांवों में पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। जहां धरती सौ फुट पर ही पानी उगल देती थी, अब वहां का जलस्तर 300 फुट नीचे चला गया है।पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व आज भी सूबे का गौरव है, लेकिन कहने भर के लिए। जंगल से न सिर्फ घास, पेड़-पौधे बल्कि जानवर भी गायब हो चले हैं। यहां अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और जानवरों का शिकार आम बात बन गई है। कभी यहां दर्जनों बाघ दहाड़ते थे। अब बमुश्किल एक दर्जन बचे हैं। इसी तरह मोतिहारी शहर में सड़कों के किनारे लगाए गए ऐतिहासिक महोगनी के पेड़ सबकी आंखों के सामने काट डाले गए। धरती का आंचल सपाट हो गया। पर किसी को तरस नहीं आया। ऐसे संकट के दौर में हम ताल ठोक कर कैसे गाएं - आज धरती बनी है दुल्हन साथियो।
प्रस्तुति - एम. अखलाक
(पृथ्वी दिवस पर यह रपट दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर के पेज वन पर छप चुकी है।)
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9 वर्ष पहले